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एम.बी.बी.एस. कोर्स को घटाकर 50 हफ्ते किया गया, एक्जॉम पेटर्न में भी बदलाव, 2019 से ही होगा लागू

नई दिल्ली. मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एम.सी.आई) ने एम.बी.बी.एस. कोर्स की समय सीमा कम कर दी है. साथ ही इसके सिलेबस में भी बदलाव किया है. एक्जॉम पेटर्न में भी बदलाव किया गया है. एससीआई का यह बदलाव 2019 में एडमिशन लेने वाले छात्रों पर लागू हो जाएगा. इससे पहले एडमिशन लेने वाले छात्रों पर यह लागू नहीं होगा.

एमसीआई के अनुसास एम.बी.बी.एस. का कोर्स अब 4.6 वर्ष यानि 54 हफ्तों के बजाए अब 4.2 वर्ष या 50 हफ्तों का ही होगा. सीधे-सीधे 4 महीने घटा दिए गए हैं. इसी तरह सिलेबस में भी आंशिक बदलाव किया गया है. फोरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सिलॉजी विषय को द्वितिय वर्ष से हटाकर कर तृतीय वर्ष के प्रथम भाग में रख दिया गया है.

एम.बी.बी.एस. कोर्स में पहले साल 13 महीने का होगा. दूसरे साल 11 महीने का. तीसरे साल को दो भागों में विभाजित किया गया है. तीसरे साल का पहला भाग 12 महीने का और दूसरा भाग 14 महीने का होगा.

एमसीआई ने परीक्षा पाठ्यक्रम में भी बदलाव किया है. वर्तमान में एक ही प्रश्न पत्र होता है. इसमें 100 अंकों का थ्यौरी पेपर होता है. 20 अंक मौखिक और 40 अंक प्रेक्टिकल (प्रयोग) और आंतरिक परीक्षण (इंटरनल एक्जामिनेशन) के होते हैं.

अब दो पेपर होंगे. 200 अंकों का थ्यौरी पेपर होगा और 100 अंकों का अलग से प्रेक्टिकल पेपर होगा. इसमें मौखिक और आंतरिक परीक्षण अंक शामिल होंगे. विश्वविद्यालय की परीक्षा में बैठने के लिए छात्र को थ्यौरी और प्रेक्टिकल दोनों में मिलाकर 50% अंक लाने होंगे. साथ ही विश्वविद्यालय की परीक्षा में पास होने के लिए उसे थ्यौरी और प्रेक्टिकल दोनों परीक्षाओं में 50% अंक लाने होंगे. आंतरिक परीक्षण के नंबर बाद में विश्वविद्यालय के नंबरों के साथ अलग से दिखा दिए जाएंगे.

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